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Eyes Do Not Want to Close at All Times, or, Perhaps One Day Rome Will Allow Herself to Choose in Her Turn

Les yeux ne veulent pas en tout temps se fermer, ou Peut-être qu'un jour Rome se permettra de choisir à son tour

निर्देशक Danièle Huillet, Jean-Marie Straub
पश्चिमी जर्मनी, इटली, 1970
नाटक
  • फ्रेंच
  • अंग्रेज़ी
स्ट्राब-हुइलेट की फिल्में

सारांश

पियरे कॉर्निले की क्लासिक ट्रेजेडी ओथन का हूबहू रूपांतरण आधुनिक रोम में खंडहर में स्थित है। नाटक के साथ, फिल्म उस प्रक्रिया की जांच करती है जिसके द्वारा घटनाएँ हमारी सांस्कृतिक मुख्यधारा में प्रवेश करती है, और प्रक्रिया के ज़रिये संचार प्रणाली के हिस्से के रूप में उनका उपयोग संस्कृति में बदलता है।

हमारा अभिप्राय

हम अपनी अगली स्ट्रॉब-हुइलेट फिल्म के लिए शाही इटली के लिए निकलते है, जो सदियों से सत्ता संघर्षों के खेल का आह्वान करने के लिए 1969 के रोम को कॉर्नेल के 17वीं सदी के नाटक के साथ जोड़ती है। अतीत को उग्रतापूर्वक रूप से जीवंत दिखाया गया है और पुराने ग्रंथ वर्तमान क्षण के विशद रूप को बयां करते हैं।

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समीक्षक के रिव्यू

It unearths a complex archeology of contradictions. Rather than isolating individual layers of history and narrative, it invites the viewer to experience the tension between past and present, between fiction and reality. Othon is demanding, but thought and reflection shouldn’t detract from our appreciation of the film. The “clique of power” that Straub-Huillet challenge governs not only the structures of power but also the aesthetic standards through which we judge art as valuable or not.
September 20, 2017
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